13/10/2024
के साथ आज का सफर:-
#बालूशाही
बिहार की राजधानी पटना से शिवहर सीतामढ़ी जाने के क्रम में मुजफ्फरपुर के बाद जो पहले मार्केट है वह है रुन्नीसैदपुर, हाईवे रोड के दोनों किनारे फैले इस बाजार की एक मिठाई ने इसे राष्ट्रीय नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई है। बिहारी व्यंजनों में अपनी विशिष्टता के लिए मशहूर रुन्नीसैदपुर की लजीज मिठाई 'बालूशाही' के स्वाद के बिना सीतामढ़ी की यात्रा अधूरी है। माना जाता है कि रुन्नीसैदपुर की विशिष्टता को दर्शाने में इस पारंपरिक मिठाई की भूमिका अहम है। छेने के साथ सुजी की एक खास अनुपात के साथ चीनी की चाशनी में बनाई जाने वाली इस मिठाई की खासियत यह है कि बगैर फ्रीज के एक सप्ताह से दस दिनों तक भी यह खराब नहीं होती है। सैकड़ों वर्ष पूराने अपने इतिहास को समेटे तथा एक लंबे सफर को तय करने के बाद इस मिठाई को अपनी पहचान व ख्याति मिली है। समय के साथ साथ इसमें बदलाव भी हुए और ख्याति व पहचान का दायरा भी बढ़ा है। अब तो, रुन्नीसैदपुर की बालूशाही पटना की गलियों में भी अपने जायके को लेकर मशहूर होने लगी है।इसकी ख्याति इस प्रकार कि राज्य के बाहर से आने-जाने वाले पर्यटक भी सौगात के तौर पर रुन्नीसैदपुर की बालूशाही ले जाना नहीं भूलते। इसकी विशिष्टता में खास यह भी है कि छेने से निर्मित होने के बावजूद इतनी सस्ती, टिकाऊ व लजीज मिठाई पूरे प्रदेश में कहीं और शायद हीं मिले। अपनी विशिष्टता के लिए मशहूर इस मिठाई के लिए आपको किसी से पूछने की जरूरत नहीं है। स्थानीय बस स्टॉप के अलावा एनएच 77 के किनारे दर्जनों ऐसी दुकानें हैं जहां बालूशाही 120 रूपए से 200 रुपए प्रति किलो बेची जाती है। इस व्यवसाय में अपने लंबे अनुभव को साझा करते व्यवसायी प्रभात जी की मानें तो शादी विवाह के विशेष मौके को छोड़ रुन्नीसैदपुर बाजार की छोटी-बड़ी सभी दुकानों को मिलाकर प्रतिदिन औसतन 25 से 30 क्विंटल बालूशाही की बिक्री हो जाती है। विशेष सीजन में इसकी बिक्री 40 क्विंटल के पार भी पहुंच जाती है।